छठ पूजा 2021, छठ पूजा कैसे मनाई जाती है, छठ पूजा की विधि,
छठ पूजा की कथा (छठ पूजा क्यों मनाई जाती है), छठ पूजा सामग्री
छठ पूजा का पर्व हिंदू धर्म द्वारा मनाया जाने वाला महापर्व है। छठ पूजा को बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश के साथ भारत के कई बड़े शहरों में पुरी श्रद्वा - भक्ति के साथ मनाया जाता है। छठ पूजा हर साल दीवाली के छह दिन बाद बड़े धूम -धाम से मनाई जाती है। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें सुहागन महिलाएं तीन दिन का व्रत रखती है। इन व्रतों को सबसे कठिन व्रत में से एक माना जाता है। इस तीन दिन के व्रत में महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती है। व्रत के पारण तक इस व्रत में महिलाएं एक बूंद पानी का सेवन भी नहीं करती है। छठ पूजा की शुरुआत डूबते हुए सूर्य देव की पूजा से होती है। इस पर्व में छठी मय्या और सूर्यदेव की पूजा करने का विधान है। आगे इस ब्लॉग में आप छठ पर्व की पुरी जानकारी पढ़ेंगे।
छठ पूजा 2021 में कब है
छठ पूजा के पर्व की शुरुआत हर साल कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी
दिनांक से हो जाती है और छठ पूजा का पर्व शुक्ल पक्ष की षष्ठी दिनांक को मनाया
जाता है
1.
छठ पर्व का पहला दिन (नहाए -खाय) - 08 नवंबर, 2021 (सोमवार)
2.
छठ पर्व का दूसरा दिन (खरना) - 09 नवंबर, 2021 (मंगलवार)
3.
छठ पर्व का तीसरा दिन (छठ पूजा) - 10 नवंबर, 2021 (बुधवार)
4. छठ पर्व का चौथा दिन (समापन) - 11 नवंबर, 2021 (गुरुवार)
छठ पूजा कैसे मनाई जाती है,
छठ पूजा की विधि
छठ पूजा का पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। जिसमें प्रत्येक दिन का अपना
महत्व है। आइए जानते है छठ का महापर्व कैसे मनाया जाता है।
1.
नहाए -खाय - छठ पर्व की शुरुआत कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष
की चतुर्थी दिनांक से नहाए -खाय से होती है। इस दिन सबसे पहले घर की साफ -सफाई
करके घर का शुद्धिकरण किया जाता है। व्रती महिलाएं स्नान करके नए वस्त्र पहनकर
भगवान की आराधना के बाद व्रत रखने का संकल्प करती है। फिर घर में सीताफल की सब्जी,
चना दाल और चावल को बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया
जाता है। इस दिन भोजन सबसे पहले व्रती महिलाएं करती है उसके बाद परिवार के सदस्य
भोजन करते है।
2.
खरना - कार्तिक महीने की पंचमी दिनांक को छठ पर्व का खरना
मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन का उपवास रखती है। फिर सूर्यास्त के बाद
लकड़ी के चूल्हे पर चावल और गुड़ से खीर बनाकर छठ मैय्या को भोग लगाकर प्रसाद के रुप
में व्रती महिलाएं ग्रहण करती है और बाद में परिवार के लोगों को भोजन कराया जाता है।
इसके बाद व्रती महिला 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती है। जिसमें पानी की एक बूंद का
भी सेवन नहीं किया जाता है।
3.
छठ पूजा - शुक्ल पक्ष की षष्ठी तारिक के दिन छठ पूजा के लिए
विशेष प्रसाद ठेकुआ और चावल के लड्डू बनाया जाता है। फिर एक बांस की टोकरी में पांच
तरह के फल, गन्ना, मिठाई, ठेकुआ,चावल के लड्डू, नारियल, नींबू रखकर सजाया जाता है। उसके बाद पुरुष अपने सिर के ऊपर
टोकरी रखकर छठ घाट की ओर जाते है, और महिलाएं छठी मय्या के भजन गाते हुए साथ में चलती है। छठ
घाट पर पहुंचकर घर के सदस्य द्वारा नदी की मिट्टी से वेदी बनाई जाती है। उस वेदी में
व्रती महिला नारियल रखकर दीपक जलाती है। फिर सूर्यास्त से कुछ देर पहले व्रती
महिला पूजा सामग्री के साथ नदी एवम् तालाब में घुटने भर पानी में जाकर सूर्यदेव को
अर्घ्य देती है।
4.
छठ पर्व का चौथा दिन (समापन) - छठ पर्व के आखिर दिन छठ घाट
पर जाकर उगते हुए सूर्यदेव को व्रती महिला नदी एवम् तालाब में उतरकर अर्घ्य देकर 11 बार परिक्रमा लगाती है, और छठी मय्या की कथा सुनती है। फिर प्रसाद वितरण करके अपना
निर्जला व्रत खोलती है।
छठ पूजा की कथा (छठ
पूजा क्यों मनाई जाती है)
छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मय्या की पूजा करने से परिवार में सुख - समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए भी यह व्रत रखा जाता है, और ऐसा कहा जाता है जिन दंपति के संतान नहीं हो रही होती उनको यह व्रत रखकर संतान की प्राप्ति होती है। छठ पूजा को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाओं का जिक्र किया जाता है। जानते है उन कथाओं के बारे में
1.
राजा प्रियवद और रानी
मालिनी की कहानी
छठ की पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रियवद जिनकी धर्मपत्नी मालिनी थी. उनको शादी के कई वर्षों के बाद भी संतान की प्राप्ति नहीं होती। इस कारण दोनों दुःखी रहते थे. एक दिन राजा ने संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप से उपाय पूछा। तब महर्षि कश्यप ने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ करने को कहा, फिर प्रियवद ने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। महर्षि कश्यप ने यज्ञ की आहुति के लिए बनाई गई खीर को मालिनी को ग्रहण करने को कहाँ , इसके बाद मालिनी गर्भवती हो जाती है। 9 महीने बाद उनको पुत्र की प्राप्ति होती है, जो मृत पैदा हुआ होता है।
जब यह बात प्रियवद को पता चलती है, वह दुःखी होकर अपने प्राण त्याग ने की कोशिश करते है। तभी प्रियवद के सामने एक देवी प्रकट होती है। वह देवी कहती है मैं षष्ठी देवी हूँ, मैं सभी लोगों को संतान का सौभाग्य प्रदान करती हूँ। पृथ्वीलोक में जो भी मनुष्य मेरी पूजा पुरी श्रद्वा - भक्ति से करता है उसको मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। तब राजा प्रियवद और रानी मालिनी ने कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी दिनांक को षष्ठी देवी की पूजा पूरे विधि विधान से करके षष्ठी देवी को प्रसन्न कर दिया, इस पूजा के बाद उनको पुत्र की प्राप्ति हुई, इसलिए तब से छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है।
2.
कर्ण की कथा
पौराणिक कथाओं में ऐसा भी कहाँ गया है कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल के
समय हुई थी। क्योंकि सूर्यपुत्र कर्ण सूर्यदेव के बहुत बड़े भक्त थे. वह नदी के
अंदर जाकर कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्यदेव की तपस्या करके उनको अर्घ्य देते थे.
इसी तपस्या और अर्घ्य देने कारण वह एक शक्तिशाली योद्धा बने। आज भी छठ पर्व में
सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है।
3. भगवान श्री राम और माता सीता का
उपवास
छठ पर्व की एक मान्यता यह है कि भगवान श्री राम ने लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद जब राम राज्य की स्थापना करी, उस दिन कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी दिनांक थी. उस दिन भगवान राम और माता सीता ने उपवास रखकर सूर्यदेव की आराधना करी और सप्तमी के दिन सूर्योदय के समय दुबारा आराधना करके सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया।
4. द्रौपदी का छठ का उपवास
पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत के समय जब पांडवों और कौरवों के बीच जुआं चल रहा था। तब पांडव उस जुएं में अपना सारा राज -पाठ कौरवों से हार जाते है। फिर द्रौपदी अपने परिवार की सुख - समृद्धि के लिए छठ का व्रत रखती है। द्रौपदी के व्रत रखने के बाद पांडव अपना सारा राज -पाठ कौरवों से प्राप्त कर लेते है, और द्रौपदी की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
छठ पूजा सामग्री
छठ व्रत में पूजन सामग्री का विषेश महत्व होता है। इसलिए छठ व्रत के लिए पूजन सामग्री समय पर
एकत्रित कर लेना चाहिए। छठ व्रत की पूजन सामग्री इस प्रकार है।
1. गन्ने जिसमें पत्ते हो
2. जटाधारी नारियल
3. दूध, चावल, गेहूं और चावल का आटा, गुड़, शहद और मिठाई
4. शकरकंदी और सुथनी, पान और साबुत सुपारी
5. सिंदूर, दीपक, कुमकुम, चंदन, धूप, कपूर
6. बड़ा नींबू मीठा (डाभ), केला, शरीफा और नाशपाती, सिंगाड़ा
7. अदरक का हरा पौधा, मूली पत्ते वाली और हल्दी
8. टोकरी दो बड़ी प्रसाद रखने के लिए, सूप बांस या पीतल का
9. एक गिलास, एक लोटा और थाली
10. पुरुष और महिला के लिए नए वस्त्र

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