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Jayalalitha Biography in Hindi - जयललिता बायोग्राफी

 

जयललिता बायोग्राफी,जयललिता का प्रारंभिक जीवन, जयललिता का फिल्मी सफर, जयललिता और एमजीआर का संबंध, जयललिता का राजनीतिक करियर, जयललिता को दिए गए सम्मान, जयललिता की हॉबी, जयललिता की मृत्यु

 


 

एक महिला जो अपने जीवन में ना तो अभिनेत्री बनना चाहती थी और न ही राजनीतिज्ञ लेकिन उनका भाग्य उनको एक सफल अभिनेत्री भी बनाता है और तमिलनाडु राज्य का पांच बारी मुख्यमंत्री भी जिन्हें लोग प्यार से अम्मा भी बुलाते थे और पुराची थलाईवी भी जी हा हम बात कर रहे है जयललिता जयराम की जिन्हें जयललिता के नाम से जाना जाता था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कन्नड़ फिल्म से करी, उसके बाद उन्होंने तेलुगु , तमिल, मलयालम और हिंदी फिल्मों में काम करके एक प्रसिद्ध अभिनेत्री बनी। फ़िल्मी दुनिया को छोड़कर वह राजनीति के मैदान पर उतरकर राजनीति में भी सफलता प्राप्त करी। वह आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) पार्टी की तरफ से चुनाव जीतकर पांच बारी तमिलनाडु राज्य की मुख्यमंत्री रही। जयललिता एक सफल अभिनेत्री और राजनीतिज्ञ के साथ एक कुशल नृतकी भी थी. आज के इस ब्लॉग में हम उनके जीवन का परिचय पढ़ेंगे। जिसमें जयललिता का प्रारंभिक जीवन, फिल्मी सफर, राजनीतिक सफर के अलावा उनके निजी जीवन के क़िस्से होंगे।

जयललिता का प्रारंभिक जीवन !

कर्नाटक राज्य के मैसूर के मांडया जिला में जयललिता जी का जन्म 24 फरवरी 1948 को अय्यर परिवार में हुआ था. उनके पिता जय राम एक पेशेवर वकील थे, और उनकी मां वेदवल्ली (संध्या) एक तमिल अभिनेत्री थी. जयललिता जब मात्र दो वर्ष की थीं, तब उनके पिता का स्वर्गवास हो जाता हैं। पिता की मृत्यु के बाद उनकी  मां जयललिता और उनके भाई जय कुमार को अपने पिता के घर बेंगलुरु ले जाती है। जयललिता का पालन - पोषण उनके नाना के घर में हुआ। उनकी मां वेदवल्ली ने अपने दोनों बच्चों की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए फिल्म अभिनेत्री बनकर अपना फिल्मी नाम संध्या रख लिया था। जयललिता ने अपने स्कूल की शिक्षा बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल से प्रारंभ करी। अपनी पढाई के दौरान वह एक आदर्श विद्यार्थी थी और अपनी परीक्षाओं में हमेशा उच्च स्थान प्राप्त करती थी। जयललिता अपने पिता की तरह वकील बनना चाहती थी। उनको डांस का बहुत शोक था इसके लिए उन्होंने भरतनाट्यम सांस्कृतिक डांस सीखकर एक कुशल नृतकी भी बनी। तब उनकी मां संध्या ने जयललिता को अपनी तरह एक अभिनेत्री बनाना चाहती थीं।

पूरा नाम(Full Name)

जयललिता जयराम 

अन्य नाम(Other Name)

जयललिता, अम्मा 

निक नाम(Nick Name)

पुराची थलाईवी

जन्म दिनांक(Birth Date)

24 फरवरी, 1948

मृत्यु(Death)

5 दिसंबर, 2016 

उम्र(Age)

65 वर्ष

जन्म स्थान(Birth Place)

मांड्या जिला मैसूर, कर्नाटक

गृहनगर(Home Town)

मांड्या जिला मैसूर, कर्नाटक

जाति(Caste)

अय्यर

वैवाहिक स्थिति(Marital Status)

अविवाहित

पिता(Father)

स्व जयराम

माता(Mother)

स्व वेधवल्ली (संध्या)

पेशा(Profession)

अभिनेत्री, राजनीतिज्ञ, लेखिका, नर्तकी

स्कूल (school)

बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल

राष्ट्रियता(Nationality)

इंडियन

राजनैतिक पार्टी(Political Party)

AIADMK

जयललिता का फिल्मी सफर

जयललिता  तमिल, तेलुगु,कन्नड़ और मलयालम फिल्म की सफल अभिनेत्री थी.उनकी ज्यादा तर फिल्में उस समय पर सिल्वर जुबली मनाती थीं। जयललिता के फिल्मी करियर शुरुआत 13 वर्ष की आयु में हो गई थी। जब वह स्कूल में थी तब उन्होंने अपने  करियर की पहली फिल्म, "एपिस्टल" अंग्रेजी भाषा में करी, जो सन 1961 में रिलीज़ हुई थीं।

जयललिता ने 15 वर्ष की आयु में मुख्य अभिनेत्री का रोल 1964 में रिलीज हुई, कन्नड़ फिल्म "चिन्नड़ा गोम्बे " में किया था। इस फ़िल्म में उनके साथ मुख्य अभिनेता का रोल एम. वी राजम्मा ने किया और इस फिल्म का निर्देशन बीआर पंथुलु ने किया था। जयललिता का रंग एकदम साफ़ था और वह बेहतरीन अदाकारा भी थी इसलिए उन्हें साउथ की फिल्मों की सभी भाषाओं में काम करने के ऑफर आते रहते थे। 

इसके बाद उन्होंने तेलुगु फ़िल्म इंडस्ट्रीज में क़दम रखा। मनुशुलु ममाथालु फिल्म में वह मुख्य अभिनेत्री के किरदार में दिखाई दी। यह फ़िल्म उनके करियर की पहली मुख्य अभिनेत्री के रुप में डेब्यू तेलुगु फ़िल्म थी। इस फ़िल्म का  के. प्रत्यगात्मा ने निर्देशन किया था और अभिनेता का किरदार नागेश्वरा राव ने किया था। यह फिल्म बड़े परदे पे रिलीज़ साल 1965 को हुई थी।

जयललिता ने अपने फिल्मी करियर को आगे बढ़ाते हुए तमिल फिल्म इंडस्ट्रीज में भी मुख्य अभिनेत्री के रुप में डेब्यू किया। साल 1965 में उनकी तमिल फिल्म वेत्रिरा अदाई रिलीज हुई, जिसका निर्देशन सीवी श्रीधर ने किया था इस फिल्म में उन्होंने शोभा नाम की विधवा का किरदार निभाया था. इस फिल्म में जयललिता ने पश्चिमी कल्चर की ड्रेस पहनकर साउथ फिल्म इंडस्ट्रीज की पहली अभिनेत्री थी, जिसने स्कर्ट पहनी हो। उस समय इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला था और जयललिता की उम्र लगभग 17 वर्ष थी. जिस कारण वह अपनी यह फिल्म बड़े परदे पर नहीं देख पाई थी.

साल 1965 में जयललिता को साउथ फिल्म के सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन के साथ पहली बार काम करने का मौका मिला।

इसके बाद जयललिता ने साउथ की फिल्मों के कई सुपरस्टार के साथ काम किया जैसे शिवाजी गणेशन आदि लेकिन सबसे ज्यादा फिल्में उनकी एमजी रामचंद्रन के साथ आई, और उनकी जोड़ी उस समय साउथ की फिल्मों में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जोड़ी थी।

साल 1968 में जयललिता ने बॉलीवुड मूवी इज्जत में मुख्य अभिनेत्री का रोल निभाया। इस फिल्म में उनके साथ मुख्य अभिनेता का किरदार धर्मेन्द्र ने निभाया था. इसके अलावा फिल्म के कुछ अहम क़िरदार तनूजा और महमूद ने भी निभाये थे। इस फिल्म से पहले जयललिता बॉलीवुड मूवी मन - मोजी में एक छोटा सा क़िरदार भी निभा चुकी थी.

जयललिता ने तमिल, तेलुगु ,मलयालमहिंदी, कन्नड़ भाषाओं में लगभग 300 फिल्मों में काम किया। जिसमें उन्होंने कई सिल्वर जुबली फिल्में करी।

इन फिल्मों में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले जैसे फिल्म फेयर अवार्ड बेस्ट अभिनेत्री तमिल फिल्म 1972 को, उसी साल तेलुगु फिल्म के लिए भी फिल्म फेयर अवार्ड बेस्ट अभिनेत्री और साल 1973 को तेलुगु फिल्म के लिए।

साल 1980 में उन्होंने अपने फिल्मी करियर की आख़िरी फिल्मी मुख्य अभिनेत्री के रुप में  नाकोड़ा विनायकुडू तेलुगु फिल्म करी थी इस फिल्म के हीरो नागेश्वरा राव थे.इसके बाद उन्होंने कुछ फिल्मों में गेस्ट अपीयरेंस रोल किए।

जयललिता और एमजीआर का संबंध

जयललिता और एमजीआर के बीच में कोई साधारण संबंध नहीं था। उनके संबंधों को लेकर कई बातें कहीं जाती है. यह तो उनके निजी जीवन से साफ़ झलकता था. कि दोनों के आपसी संबंध प्रेमियों से कई बढ़कर थे। जयललिता और एमजीआर के रिश्तों में काफ़ी उतार चढ़ाव आए।  एमजीआर ने ही जयललिता को अभिनेत्री से राजनेत्री बनाया था.

जयललिता ने जब अपना फिल्मी करियर शुरु किया था तब निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, राजनेता मारुदुर गोपालन रामचंद्रन (जो एमजीआर के नाम से मशहूर) साउथ फ़िल्म के एक बड़े सुपरस्टार थे।

एमजीआर की मुलकात जयललिता से एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. उस समय एमजीआर जयललिता की सुंदरता के कायल हो गए थे , जिसके बाद जयललिता को अपने फिल्मी करियर में जल्द ही उनके साथ काम करने का मौका मिला, और जयललिता उनसे प्यार करने लगी, मगर एमजीआर शादीशुदा थे, इसलिए वह अपना प्यार जगजाहिर नहीं करते थे, लेकिन एक बार जब जयललिता धूप में नंगे पांव अपनी कार की तरफ जा रहीं थी, तब एमजीआर उनको अपनी गोद में उठा लेते है। यह दर्शाता था कि एमजीआर भी जयललिता से प्यार करते थे।

फिर दोनों ने साथ में 28 हिट फिल्में करी, इस दौरान दोनों के बीच थोड़ा मन मुटाव आ गया था.क्योंकि जयललिता एक पत्नी की तरह एमजीआर की सारी बातें सुनती थी, मगर उनको यह आधारिक दर्जा प्राप्त नहीं हुआ और एमजीआर दूसरी अभिनेत्री के साथ फिल्में करने लगे थे।

मगर तब जयललिता साउथ फिल्मों की एक मशहूर अभिनेत्री बन चुकी थी। वह अपने निर्णय ख़ुद लेने लगी। जब एमजीआर के साथ उनका रिश्ता ख़त्म हो गया था। तब उनकी नजदीकियां साउथ के दूसरे सुपरस्टार शोभन बाबू के साथ बढ़ गई थी. उस समय ऐसी बातें कहीं जाती थी कि शोभन बाबू और जयललिता ने छुपके से शादी कर ली है, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं चला।

1970 के दशक में जब एमजीआर भारी मतों से विजय प्राप्त करके तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। तब उन्होंने जयललिता को वापस अपने पास बुलाया और दोनों के बिच के आपसी मन मुटाव समाप्त हो गए। जयललिता ने इस बात को कभी कबूल नहीं किया, कि एमजीआर के साथ उनके प्रेम संबंध थे वो हमेशा यह कहती थी, कि वह मेरे जीवन के मेंटर है।

जयललिता का राजनीतिक करियर

साल 1982 में जयललिता ने एमजीआर द्वारा स्थापित पार्टी आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) में प्रवेश किया।

एमजीआर ने उन्हें AIADMK की तरफ से राज्यसभा भेजा, क्योंकि जयललिता की अंग्रेजी भाषा में अच्छी पकड़ थी.वह 1984 से 1989 तक तिरुचेंदूर सीट से  राज्यसभा की सदस्य रहीं। इस दौरान उन्हें पार्टी के प्रचार - प्रसार की भूमिका भी मिली।

साल 1987 में एमजीआर की मृत्यु के बाद AIADMK पार्टी दो दलों में विभाजित हो गई। एक दल जयललिता के साथ था, तो दूसरा दल एमजीआर की पत्नी वी.एन जानकी के साथ तब जयललिता को काफ़ी संघर्ष करना पड़ा पार्टी को जोड़ने के लिए।

साल 1990 में  AIADMK पार्टी को पुनः एकजुट करने में वह सफल रहीं।

साल 1991 में लिट्टे संगठन द्वारा राजीव गाँधी की हत्या कर दी जाती है, उस समय जयललिता कांग्रेस से गठबंधन करके, राजीव गाँधी की हत्या से लोगों के बीच में जो सहानुभूति जागृत हुई थी, उस से उन्हें काफ़ी फ़ायदा मिला, उनकी पार्टी को भारी मतों से विजय प्राप्त हुई।

साल 1991 में वह पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी। इसके साथ उनके नाम तमिलनाडु की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ।

साल 1995 में अपने गोद लिए हुए पुत्र वी एन सुधाकरन की शादी में किये गए अत्यधिक ख़र्चे के लिए वह सुर्खियों में रहीं, जिसकी काफ़ी आलोचना हुई।

साल 1996 में उनके ऊपर गैरकानूनी सम्पत्ति रखने के लिए भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया। इस कारण उनकी पार्टी 1996 का चुनाव हार गई।

साल 2001 में जयललिता की पार्टी ने चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन करा और वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बनी। लेकिन एक भ्रष्टाचार के मामले में दोषी साबित होने के कारण उनको अपना मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा।

फिर साल 2002 में जयललिता ने पुनः मुख्यमंत्री  का पद संभाला। इस कार्यकाल में उन्होंने कई कठोर फैसले लिए जैसे जब सरकारी कर्मचारी किसी मुद्दे को लेकर हड़ताल पर चले गए थे। तब जयललिता ने 2 लाख सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बरखास्त कर दिया था।

साल 2011 में जयललिता की पार्टी ने अपनी सहयोगी दलों की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जिसमें उनकी पार्टी को सबसे अधिक सीटें मिली। उन्होंने चुनाव जीतकर चौथी बारी तमिलनाडु राज्य के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली।

साल 2014 में उन्हें दुबारा मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा। उनके ऊपर चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया और उन्हें चार वर्ष की सजा सुनाई गई।

जयललिता ने अपने ऊपर चल रहे मुकदमों को क़ानूनी रुप से सुलझाने के लिए कर्नाटक उच्च न्यालय में अपील करके ख़ुद को निर्दोष साबित किया और पाँचवीं बार मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली।

साल 2014 में मोदी लहर के सामने लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 39 सीटों में 37 सीट पर जीत हासिल करके जयललिता का कद ओर भी बड़ा दिया था।

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के सामने कोई दूसरी पार्टी टिक नहीं पाई और उनकी पार्टी ने रिकार्ड मतों से विजय प्राप्त करी। इन चुनावों में जीत के बाद जयललिता ने छठी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री की सीट पर कब्ज़ा किया।

जयललिता को दिए गए सम्मान

1. साल 1972 में तमिलनाडु सरकार ने जयललिता को कलईममानी अवार्ड से सम्मानित किया।

2. साल 1991 में मद्रास यूनिवर्सिटी ने जयललिता को डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर की डिग्री की उपाधि प्रदान की गई।

3. साल 1992 में डॉ. एम.जी.आर यूनिवर्सिटी ने डॉक्टर ऑफ़ साइंस की उपाधि प्रदान की गई।

4. साल 2003 में तमिलनाडु के कृषि यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।

जयललिता की हॉबी

जयललिता प्रतिभाशाली महिला थी। उन्हें भारतीय सांस्कृतिक नृत्य के अलावा साउथ की सभी भाषाओं का अच्छा ज्ञान था, जिन्हें वह बोल और समझ भी सकती थी। उन्हें घुड़सवारी, तैराकी और लिखने का भी शोक था।

जयललिता की मृत्यु

जयललिता को हार्ट अटैक के बाद 22 सितम्बर 2016 को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भरतीं किया गया था। जहां इलाज के दौरान 5 दिसंबर 2016 को उनका निधन हो  गया।


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