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Mahatma Gandhi :अहिंसक आंदोलन, सत्याग्रह,जन्म, मृत्यु, हत्या

 

महात्मा गाँधी की जीवनी (Mahatma Gandhi Biography

 Hindi)अहिंसक आंदोलनसत्याग्रहभारत की स्वतंत्रता में अहम

भूमिकाजन्ममृत्युहत्या


शांति सत्य और अहिंसा के राह पे चलते हुए भारत को अंग्रेजो से आजादी दिलाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी है उनको राष्ट्रपिता और बापू के नाम से भी जाना जाता है महात्मा गाँधी जी को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े राजनेता औरआध्यात्मिक नेता माना जाता है.उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पे चलते हुए भारत की आजादी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

महात्मा गाँधी जयंती 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 

दिनांक 

दिन

साल

02अक्टूबर

शनिवार

2021

02अक्टूबर

रविवार

2022

02अक्टूबर

सोमवार

2023

02अक्टूबर

बुधवार

2024

02अक्टूबर

गुरुवार

2025

 

महात्मा गाँधी का परिचय

मोहनदास करमचंद गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर1869 को गुजरात के पोरबंदर मे शनिवार के दिन गुजराती बनिया वेश्या जाती के करमचंद गाँधी और पुतलीबाई के घर हुआ. महात्मा गाँधी तीन भाई थे,जिसमे सबसे छोटे वह थे उनके पिता करमचंद गाँधी जिनका पूरा नाम करमचंद  उत्तमचंद गाँधी थापुतलीबाई उनकी चौथी पत्नी थी करमचंद गाँधी राजकोट में दिवान के उच्च पद पर नौकरी करते थे. गाँधी जी का विवाह 13 साल की उम्र में कस्तूरबा से हो गया था। उनके चार बेटे थे हरिलालमनीलालरामदास और देवदास। महात्मा गाँधी ने अपनी पढ़ाई काफी संघर्ष से करी क्योंकि उनके पिताजी बीमार हो गए थे जो घर में एकमात्र जॉब करते थेगाँधी ने अपनी स्कूल की शिक्षा राजकोट के अल्बर्ट हाई स्कूल से प्राप्त करी इसके बाद उनकी दिलचस्पी वकालत मे हुई और उन्होंने सामलदास कॉलेज मे दाखिला लिया,उन्होंने अपने कॉलेज को बिच में ही छोड़ दियाफिर वह साल 1888 मे ब्रिटेन चले गए उन्होंने वहा वकालत की पढ़ाई UCL Faculty of Laws से करी और उनकी वकालत की पढ़ाई 1891 मे पूरी हुई। बैरिस्टर बन ने के बाद भारत लौटकर वकालत करने लगे.

नाम

मोहनदास करमचंद गाँधी

जन्म दिनांक

02 अक्टूबर,1869

जन्म स्थान

पोरबंदरगुजरात

पिता का नाम

करमचंद गाँधी

माता का नाम

पुतलीबाई

पत्नी

कस्तूरबा गाँधी

संतान

हरिलाल मनीलाल रामदास और देवदास

प्रारंभिक शिक्षा

अल्बर्ट हाई स्कूल सेराजकोटगुजरात

कॉलेज

सामलदास कॉलेजभावनगरगुजरातUCL Faculty of Laws, लंदन

शिक्षा

बैरिस्टर

राष्टपिता की उपाधि

सुभासचंद्र बोस ने

योगदान

अहिंसक आंदोलनसत्याग्रहभारत की स्वतंत्रता में अहम भूमिका

मृत्यु

30 जनवरी,1948 (बिड़ला भवन, दिल्ली)

आख़िरी शब्द

"हे राम"

समाधि

राजघाटदिल्ली

हत्यारे का नाम

नाथूराम गोडसे

 

दक्षिण अफ्रीका की यात्रा

महात्मा गाँधी साल 1893 में दक्षिण अफ्रीका गुजराती व्यापारी के वकील के काम के लिए गए. यहां पर गाँधी जी के जीवन दिशा नस्लीय भेदभाव ने पूरी तरह बदल दीजब उन्हें प्रथम श्रेणी की टिकट होने के बावजूद ट्रैन से धक्का देकर निचे उतार दिया क्योंकि प्रथम श्रेणी में केवल गोरे लोग ही यात्रा कर सकते थेप्रवासी भारतीयों और अश्वेत लोगो को प्रथम श्रेणी में यात्रा करना बैन थाइस घटना ने गाँधी जी को झकझोर के रख दियाइस घटना के बाद उन्होंने अंग्रेजों द्वारा नस्लीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करने की ठान ली उन्होंने देखा भारतीयों और अश्वेत लोगों के साथ ऐसी घटनाएं आम है इसके बाद गाँधी जी ने प्रवासी भारतीयों को उनके अधिकार दिलाने और अंग्रेजों अधिकारियों के नस्लीय भेदभाव के खिलाफ सफलतापूर्वक संघर्ष किया।

भारत वापसी और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

गाँधी जी द्वारा दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेजो अधिकारियों के खिलाफ चलाये गए आंदोलन की गूंज भारत तक पहुंच गयी थीसाल 1915 में जब वो भारत लोटे उनके स्वागत के लिए उस समय के बड़ी राजनीतिक हस्तियां पहुंची। गोपाल कृष्ण गोखले जिसे वह अपना राजनितिक गुरु मानते थे. उनके साथ इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गए1915 में ही उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना करी. इसके बाद वह भारत की आजादी और अग्रेजों के गलत कानूनों के खिलाफ देश के अलग - अलग हिस्सों में हो रहे आंदोलनों में शामिल हुए। भारत में उनका पहला सफल आंदोलन 1917 में बिहार के चंपारण से हुआ जिसे चंपारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है यह सत्याग्रह नील की खेती ऊपर था जिसमें किसानों को अपनी जमीन पर ब्रिटिश हुकूमत द्वारा जबरदस्ती नील की खेती करवाई जा रही थी यह आंदोलन 4 महीने चला और किसानों को जबरदस्ती नील की खेती करने से आजादी मिली।

साल 1918 को खेड़ा के किसानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का नेतृत्व कियायह आंदोलन गुजरात के खेड़ा के एक गांव का है जहां बाढ़ से किसानों की पूरी खेती बर्बाद हो गयी थी किसान मांग कर रहे थे कि ब्रिटिश हुकूमत द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स माफ किया जाए. क्योंकि वह टैक्स भरने के लिए अभी सक्षम नहीं है इस आंदोलन में किसानों ने गाँधी जी का पूरा साथ दिया। जिसके कारण ब्रिटिश हुकूमत को किसानों के टैक्स को माफ करना पड़ा।

13 अप्रैल 1919 को जलियाँवाला बाग हत्याकांड होता है.जिसमे ब्रिटिश हुकूमत के अधिकारी द्वारा निहत्थे लोगों को गोलियों से भून दिया गया. इस हत्याकांड के बाद गाँधी जी ब्रिटिश हुकूमत से मिले इनाम ओ इकराम को वापस लोटा दिया। इसके बाद उन्होंने इसी साल हिन्दू मुस्लिम एकता से ब्रिटिश हुकूमत को भारत से बहार निकालने के लिए खिलाफत आंदोलन की मुहीम करी जो सफल नहीं हुई।

पुरे भारत में जब आजादी की मांग उठने लगी तब ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीयों की आवाज दबाने के लिए साल 1919 में रोलेट एक्ट कानून को पास कियाजिसमें प्रेस पर प्रतिबंध के साथ किसी भी नेता को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का प्रावधान था. इस काले कानून का बहिष्कार करने के लिए गाँधी जी के नेतृत्व में पूरे देश में विरोध किया गया।

1920 में बाल गंगाधर तिलक जी की मृत्यु के बाद गाँधी जी इंडियन नेशनल कांग्रेस के सबसे बड़े नेता के तोरपे जाने गए.1 अगस्त 1920 में गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत करी .यह आंदोलन ब्रिटिश हुकूमत के बढ़ते अत्याचारों के खिलाफ थी इस आंदोलन को गांव से लेकर शहर तक सब जगह पूरा समर्थन मिला इस आंदोलन से पूरा भारत एक दम ठहर गया था चोरी-चोरी कांड जिसमें किसानों ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया. जिसमें कई पुलिसवालों की जान चली गयी इसके कारण गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापिस ले लिया।

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साल 1924 में कर्नाटक के बेलगाम शहर में नेशनल कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। जिसमें गाँधी जी को इंडियन नेशनल कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।

12 मार्च 1930 में गाँधी जी ने अपने जीवन की सबसे बड़ी यात्रा दांडी मार्च गुजरात के अहमदाबाद शहर में स्थित साबरमती आश्रम से करी. इसे नमक सत्याग्रह का नाम दिया गया. यह सत्याग्रह तब हुआ जब ब्रिटिश हुकूमत ने नमक बनाने में कर लगा दिया। गाँधी जी ने इस कानून को तोड़ने के लिए अपने साबरमती आश्रम से पैदल चल कर 391 किलोमीटर यात्रा करी थी. इस यात्रा में उनका हजारों लोगों ने साथ दिया। 5 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर गाँधी जी ने नमक बना कर यह कानून तोडा।

गाँधी जी ने दलितों के साथ छुआछूत का विरोध किया और 8 मई 1933 दलित आंदोलन की  शुरुआत करी। इस आंदोलन के देश में दलितों के साथ छुआछूत जैसी बीमारी जो लोगों के अंदर थी उमसे कमी हुई।

जब भारत के बच्चे से लेकर बड़ो ने ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए और देश की आजादी के लिए जोश चरम पर था. तब गाँधी जी ने 9 अगस्त 1947 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत करी। इस आंदोलन का उदेश्ये ब्रिटिश हुकूमत को भारत से समाप्त करना था. यह आंदोलन भारत की आजादी का सबसे बड़े आंदोलनों में से एक था। जिसके कारण यह आंदोलन भारत की आजादी का आधार बना।

महात्मा गाँधी जी द्वारा करें गए कार्यों से हमें अपने जीवन में आगे बढ़ने और सही कार्य करने की प्रेरणा मिलती हैं।

गाँधी जी की मृत्यु

30 जनवरी 1948 को महात्मा गाँधी जी की हत्या बिड़ला भवन दिल्ली में नाथूराम गोडसे ने तीन गोली मार कर करी थी. गाँधी जी की मृत्यु के समय उनके मुँह से आख़िरी शब्द "हे राम" निकला। दिल्ली में राजघाट में उनकी समाधी बनाई गई और 30 जनवरी को हर साल उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है।





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